Wednesday, October 18, 2017
User Rating: / 1
PoorBest 

 


कांग्रेस के अधिवेशन को एक-दो दिन की देर थी। मैंने निश्चय किया था कि कांग्रेस के कार्यालय में मेरी सेवा स्वीकार की जाए, तो सेवा करूँ और अनुभव लूँ।

जिस दिन हम पहुँचे उसी दिन नहा-धोकर मैं कांग्रेस के कार्यालय में गया। श्री भूपेंद्रनाथ बसु और श्री घोषाल मंत्री थे।

अन्य


टीवी की शौकीन हमारी नानी जी।
खाती हैं नमकीन हमारी नानी जी।


जीवन बीता कभी मदरसे नहीं गईं,
भैंस के आगे बीन हमारी नानी जी।

बाल साहित्य


तैंतीस वर्षीय कामना खुद के लिए तो मर चुकी थी पर आए दिन कोई न कोई उसे बताता कि वो अभी जीवित है। यह सुन कर वो उठती। खुद को समेटती, जैसे उसके जिम्मे काम बहुत हों या कुछ कदम चलती और फिर अपनी परछाईं पर ढह जाती।

कहानी


''आज लखनऊ जिला जेल में यह डायरी प्राप्‍त हुई। चार डायरियाँ थी, तीन बँट गईं, एक का इस्‍तेमाल मैं करूँगा।'' यह पंक्तियाँ गणेशशंकर विद्यार्थी ने 31 जनवरी 1922 को लिखी थीं।

डायरी


10 .4 .2007

मन जो इन दिनों फालतू बिल्ली बन गया है, बहलाऊँ बहल जाता है, भगाऊँ भाग जाता है। कल शाम एकाएक लोडशेडिंग हो गई थी। गर्म, सूनी और अँधेरी शाम में मोमबत्ती की रोशनी में रहना बहुत डिप्रेसिंग लग रहा था। यूँ भी इन दिनों पीछे की तरफ का हमारा घर भुतहा घर बन गया है।

डायरी

More Articles...

Page 1 of 30

Start
Prev
1

Who's Online

We have 1387 guests online
 

Visits Counter

737993 since 1st march 2012